उरांव-कुड़ुख आदिवासी समिति ने मनाया ‘तुसगो’ पर्व, बड़ी संख्या में समाज के लोग हुए शामिल
उरांव-कुड़ुख आदिवासी समिति द्वारा 1 नवंबर को उरांव भवन में पारंपरिक ‘तुसगो’ पर्व का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ किया गया
दुर्ग।
उरांव-कुड़ुख आदिवासी समिति द्वारा 1 नवंबर को उरांव भवन में पारंपरिक ‘तुसगो’ पर्व का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर उरांव-कुड़ुख जनजाति के बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं युवाओं ने सहभागिता की, तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। आयोजन में समाज के लोगों ने एकजुट होकर अपनी पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाजों और सामुदायिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
तुसगो पर्व उरांव-कुड़ुख समाज की प्रकृति और कृषि आधारित जीवन-दृष्टि से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। इसमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, पूर्वजों के प्रति सम्मान और सामुदायिक जीवन की भावना का विशेष महत्व है। यह पर्व मनुष्य और प्रकृति के पारस्परिक संबंधों तथा समाज की सामूहिक स्मृतियों को अभिव्यक्त करता है। इसके आयोजन से समाज के लोग अपनी परंपराओं को स्मरण करते हुए आपसी मेल-मिलाप, एकता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन की उपसचिव नीलम टोप्पो मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। उनकी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। इस अवसर पर समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने तथा नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत से जोड़ने के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। आयोजन में समाज के लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह संदेश दिया कि शिक्षा, रोजगार और आधुनिक जीवनशैली के विस्तार के बावजूद उरांव-कुड़ुख समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे सामूहिक आयोजन न केवल सामाजिक एकजुटता को मजबूत करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक जनजातीय संस्कृति और सामुदायिक पहचान को पहुँचाने का माध्यम भी बनते हैं। समिति के इस आयोजन को समाज की सांस्कृतिक चेतना, एकता और परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।