दुर्ग में अवैध प्लॉटिंग का आरोप, शिकायत के बाद भी रजिस्ट्रियों का दावा
सुभाष नगर और केलाबाड़ी में जमीन की खरीद-बिक्री पर उठे सवाल, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
दुर्ग। दुर्ग शहर में कथित अवैध प्लॉटिंग का मामला एक बार फिर चर्चा में है। समाजवादी पार्टी के दुर्ग शहर अध्यक्ष शेख रज्जाक ने जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपकर शहर के सुभाष नगर और केलाबाड़ी क्षेत्र में हो रही कथित अवैध प्लॉटिंग के मामले में जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि शासन के नियमों की अनदेखी कर जमीन की खरीद-बिक्री और प्लॉट काटने का काम किया जा रहा है।
आवेदन के अनुसार, शहर के विकास के लिए शासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ भू-स्वामियों और जमीन कारोबार से जुड़े लोगों पर कथित तौर पर नियमों के विरुद्ध प्लॉटिंग करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने कहा है कि अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
पांच एकड़ जमीन पर प्लॉटिंग का आरोप
शिकायत में सुभाष नगर और केलाबाड़ी क्षेत्र में लगभग पांच एकड़ जमीन पर मुरुम और मिट्टी डालकर प्लॉटिंग किए जाने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में कहा गया है कि संबंधित जमीन पर शासन के नियमों और आवश्यक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर प्लॉट काटने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने इस मामले की स्थल जांच कर जमीन के वास्तविक उपयोग, भूमि के अभिलेखों तथा प्लॉटिंग की वैधानिक स्थिति की जांच करने की मांग की है।
खसरा नंबर 687/768 की जमीन का भी उल्लेख
आवेदन में खसरा नंबर 687/768 की लगभग 1.25 एकड़ भूमि का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस भूमि की 15 मई 2026 को रजिस्ट्री होने की जानकारी आवेदन में दी गई है। साथ ही, जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बेचने और नई मस्जिद के आसपास पिछले लगभग दो वर्षों में कई भूखंडों की बिक्री किए जाने का दावा भी किया गया है।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि संबंधित मामले में पहले शिकायत की जा चुकी है, इसके बावजूद शिकायतकर्ता की जानकारी के अनुसार कुल छह रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। इस आधार पर भविष्य में भी कथित अवैध प्लॉटिंग जारी रहने की आशंका जताई गई है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित भूमि के दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों, रजिस्ट्री की स्थिति और प्लॉटिंग के लिए आवश्यक अनुमतियों की जांच कराई जाए। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए और अनधिकृत प्लॉटिंग पर रोक लगाई जाए।
इस मामले में अब जिला प्रशासन की जांच और संभावित कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित भूमि पर प्लॉटिंग नियमों के अनुरूप की जा रही है या नहीं।