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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने निभाया वादा, सुकमा प्रवास के दौरान की गई घोषणा पर अमल

सुकमा–मलकानगिरी मार्ग 12.05 किमी के कायाकल्प के लिए 7.61 करोड़ रुपये

Pradesh Prahari
31 Oct 2026 03:37 PM
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  सुकमा/ बस्तर के वनांचल में सुशासन का उजाला हर राह को सुगम बना रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विगत माह सुकमा प्रवास के दौरान क्षेत्रवासियों से जो वादा किया था, उस पर त्वरित अमल करते हुए प्रशासन ने ग्रामीणों को एक बड़ी सौगात दी है। लोक निर्माण विभाग द्वारा सुकमा से मलकानगिरी मार्ग के 12.05 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण एवं नवनिर्माण के लिए 7 करोड़ 61 लाख 27 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। वादे से हकीकत तक का यह सफर साबित करता है कि प्रदेश सरकार दूरस्थ अंचलों के विकास और जन-आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ तत्पर है।

  यह सड़क केवल डामर और गिट्टी का ढांचा नहीं, बल्कि ग्रामीणों, किसानों और स्कूली बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी की जीवनरेखा है। वर्तमान में जलभराव, कीचड़ और उखड़ी हुई सड़क के कारण ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। खासकर आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल ले जाने और अंतर्राज्यीय सीमा पर स्थित मलकानगिरी तक व्यापार व कामकाज के सिलसिले में आने-जाने वाले लोगों के लिए यह मार्ग परेशानी भरा  था। अब पक्की और सुदृढ़ सड़क बनने की खबर से सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों में हर्ष और राहत का माहौल है।

  प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। 12.05 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के मजबूतीकरण के लिए शासन स्तर से आवश्यक वित्तीय व प्रशासकीय औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं और शीघ्र ही निविदा (टेंडर) प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। निर्माण कार्य को तय समयसीमा और उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा कराने का रोडमैप तैयार है, ताकि आने वाले समय में क्षेत्रवासियों को वर्ष पर्यंत निर्बाध व सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि सरकार दूरदराज के अंतिम व्यक्ति के सुख-दुख में पूरी संवेदनशीलता के साथ साझीदार है। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी एक नई गति मिलेगी। विकास की मुख्यधारा से जुड़ते इस सीमांत इलाके के ग्रामीणों का विश्वास अब मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ और अधिक सुदृढ़ हो रहा है।