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० पटवारियों की हड़ताल के कारण भी किसानों की दिक्कत बढ़ी

किसानों के साथ छल कर रही है साय सरकार- देवकुमार जंघेल

Pradesh Prahari
01 Nov 2026 06:38 PM
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दुर्ग। छत्तीसगढ़ के किसानों से धान खरीदी के नाम पर साय सरकार छल कर रही है। 15 नवंबर से धान खरीदने की घोषणा कर दी गई है लेकिन किसानों को नियम कायदों के जाल में ऐसा उलझाया है कि उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले सरकार ने एग्रीस्टेक आईडी वाला पंजीयन अनिवार्य कर दिया था जिससे किसान परेशान हो गए थे। इस बीच पटवारियों की हड़ताल होने से भी उनकी दिक्कतें बढ़ गई थी। किसानों ने जब इस नादिरशाही फैसले का विरोध किया तो पंजीयन की अनिवार्यता खत्म की गई लेकिन उन पर अभी भी डिजिटल क्राप सर्वे की तलवार लटकी हुई है। जिसमें भारी विसंगतियां हैं। ऐसे में साय सरकार की मंशा साफ है कि वह धान खरीदी कम मात्रा में करना चाहती है ताकि समर्थन मूल्य पर धान बेचने में असफल किसान अपना धान औने पौने दाम पर कोचियों और राइस मिल वालों को बेचने पर बाध्य हों। उक्ताशय के आरोप लगाते हुए दुर्ग नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष देवकुमार जंघेल ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि साय सरकार पहले ही अपनी मंशा जाहिर कर चुकी है कि किसान धान का उत्पादन कम कर के अन्य फसलों का उत्पादन करें जिनका बाजार ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रदेश के किसान परम्परागत धान की ही खेती कर रहे हैं जिनकी उपज को कम खरीदना पड़े इसलिए साय सरकार तरह तरह के अड़ंगे लगा रही है। अब तो लगता है कि सरकार ने जानबूझकर ऐन धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने के पूर्व पटवारियों को हड़ताल के लिए उकसाया था ताकि किसान और ज्यादा परेशान हों। यही नहीं बल्कि साय सरकार इस बार भी किसानों से प्रति क्विंटल 3100 रुपये की दर से ही धान खरीदने जा रही है जबकि केन्द्र सरकार ने पिछले तीन सालों के दौरान धान की एसएसपी में 380 रुपये की बढ़ौतरी की है। इस हिसाब से किसानों से 3500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जानी चाहिए लेकिन ऐसा न कर साय सरकार किसानों से धोखा कर रही है। देवकुमार जंघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसान इस धोखाधड़ी का जवाब आने वाले विधानसभा चुनाव में जरुर देंगे। साय सरकार यह समझ ले कि छत्तीसगढ़ का किसान धान ही नहीं बल्कि वक्त आने पर धनिया बोना भी जानता है।