Zone 3, Street No. 8, New Adarsh Nagar, Durg

9425203126

pradeshprahari05@gmail.com

किसानों का ₹1700 करोड़ बकाया बोनस तत्काल जारी करे सरकार

किसानों को अब तक लगभग 1700 करोड़ रुपये का बकाया बोनस नहीं मिलना बेहद चिंताजनक है। किसानों को बोनस की चौथी किस्त का इंतजार है,

Pradesh Prahari
22 Oct 2026 04:42 PM
👥 Visitors : 12
✅ Link copied successfully!

 

     दुर्ग।   छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, प्रदेश सरकार पर किसानों के बकाया बोनस को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को अब तक लगभग 1700 करोड़ रुपये का बकाया बोनस नहीं मिलना बेहद चिंताजनक है। किसानों को बोनस की चौथी किस्त का इंतजार है, लेकिन भुगतान में देरी के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खेती-किसानी में खाद, बीज, बिजली, डीजल और कृषि उपकरणों की बढ़ती लागत के बीच किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ और समय पर आर्थिक सहायता मिलना बेहद जरूरी है। दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार पर भी यदि किसानों को उनकी अपेक्षित राशि नहीं मिलती, तो उनके परिवारों की खुशियों पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है।
           छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य में धान की खेती और धान खरीदी किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है। किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से धान खरीदी और बोनस जैसी व्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में बकाया बोनस का भुगतान समय पर नहीं होना किसानों की चिंता बढ़ाता है। सरकार को किसानों से किए गए वादों और घोषित आर्थिक सहायता के संबंध में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि किसानों को यह पता चल सके कि उनकी बकाया राशि कब तक मिलेगी। अन्नदाता को बार-बार अपनी ही राशि के लिए इंतजार करना पड़े, यह स्थिति उचित नहीं है।
             राज्य सरकार से मांग की कि किसानों के बकाया लगभग 1700 करोड़ रुपये के बोनस और लंबित चौथी किस्त के भुगतान की स्थिति तत्काल स्पष्ट की जाए तथा पात्र किसानों को उनकी देय राशि जल्द से जल्द प्रदान की जाए।  सरकार को किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए भुगतान में हो रही देरी दूर करनी चाहिए। किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध राहत मिलनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी किसानों के अधिकारों और हितों की आवाज उठाती रहेगी तथा सरकार से मांग करती है कि अन्नदाताओं को उनका हक दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।