गंजपारा के कवि सम्मेलन ने बांधा समा
दुर्ग के युवा कवि मयंक शर्मा के संचालन की सराहना
दुर्ग। विगत 58 वर्षों से चली आ रही एक साहित्यिक परंपरा को नया आयाम देते हुए 17 अक्टूबर को गंजपारा दुर्गोत्सव समिति दुर्गा धाम पुरानीगंज मंडी के प्रांगण में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें देश के ख्याति प्राप्त कवियों में अपनी कविता का पाठ किया कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां शारदे के तैलय चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर की गई तत्पश्चात अतिथियों एवं आये हुए कवियों का स्वागत किया गया अतिथियों में मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सांसद विजय बघेल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी विधायक ललित चंद्राकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे पूर्व विधायक अरुण वोरा पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू पूर्व महापौर आर एन वर्मा दुर्ग ग्रामीण जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर समिति के संरक्षक संतोष रूंगटा संजय रुंगटा चतुर्भुज राठी किशोर जैन विनीत जैन अध्यक्ष रवि पिडिआर कार्यकारी अध्यक्ष अमित यादव कोषाध्यक्ष जितेंद्र राठी एल्डर मैन तुलसी साहू पार्षद पति सुरेश गुप्ता के आतिथ्य प्राप्त हुआ कार्यक्रम का संचालन मनोज शर्मा ने आभार प्रदर्शन संतोष रूंगटा ने किया ।
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे हैं दुर्ग के *युवा कवि मयंक शर्मा* ने अपने संचालन से पूरे कार्यक्रम का समां बांध दिया। तिरंगे के पांच रंग पर श्रोताओं ने खड़े होकर खुब आशीर्वाद दिया ।
*पूछा गया रंग कितने तिरंगे में है आया जो जवाब तो हुआ बड़ा बवाल था*
*गुरुजी थे क्रोध और छात्र मुस्कुरा रहे थे पर जवाब देने वाला छात्र बेमिसाल था*
*उसने कहा तीन रंग सब जानते हैं चक्र वाला नीला रंग भी बड़ा कमाल था*
*पापा जब द्वारे पे तिरंगा ओड़ आए थे तो मैंने देखा खून से तिरंगा लाल लाल था*
*नालंदा बिहार से आयी कवित्री अल्पना आनंद ने* ओढ़नी गीत से लोगों के मध्य धार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया
सीता के लिए राम की अनुरक्ति ओढ़नी।
शिव हेतु सती-प्रेम की अभिव्यक्ति ओढ़नी।
मीरा के शीश पर सजी तो भक्ति हो गई
दुर्गा के ओढ़ने से बनी शक्ति ओढ़नी।
*इंदौर से आये कवि एकाग्र शर्मा* ने शिव राम हनुमान पर शानदार मुक्त प्रस्तुत किया
जिस ठाट से स्वर्गलोक में देवेंद्र रहते है
ज्यों शोभते शिव के गले नागेंद्र रहते है
उसी भांति बसती है हिंदी मेरे दिल में
जैसे हनुमत हृदय में राघवेंद्र रहते है
*प्रयागराज से आये हास्य बम अखिलेश द्विवेदी* ने हास्य व्यंग का संगम प्रस्तुत किया
हम अपना दर्द बांटे या न बांटे पर हँसी बांटे.
भुलाकर सारे ग़म अपने सभी के संग खुशी बांटे.
है यारी मौत से अपनी वो एक दिन आ के मानेगी.
तो उसके आने तक क्यों न सबको जिंदगी बांटे.
*दिल्ली से आए सुदीप भोला* ने वर्तमान स्थिति बच्चीयों का मोबाइल पर रिल बनने की विडंबना पर शानदार कविता पढ़ी
पापा ने हैप्पी बर्थ डे पर मोबाइल दिलवाया था,
ऑनलाइन हो गई पढ़ाई ,किश्तों पर मंगवाया था,
पढ़ो बेटियों बढ़ो बेटियों उनने मन में ठाना था,
दुनियां कर लेगी मुट्ठी में दुनिया को दिखलाना था,
उसी मोबाइल से वो लड़की इंस्टाग्राम चलाती है
पढ़ती नहीं पढ़ाती है दिन भर रील बनाती हैं ।
*मुंबई से आए गीतकार चंदन राय* ने शानदार गीत प्रस्तुत किया
समय के साथ हर इक बात दुनिया भूल जाती है
तो मुझको क्यों अभी तक भी तुम्हारी याद आती है।
कहा उसने कभी था बिन तुम्हारे रह नहीं सकती,
मगर अब देखता हूं तो वो। हँसती मुस्कुराती है।।
समय के साथ हर इक बात दुनिया भूल जाती है